
गुरुवार से नवरात्र शुरू हो रहा है आइए नवरात्र के पावन अवसर पर हम विवाह के संबंधों को टूटने से बचाने का संकल्प लें और सिंदूर की लाज बचाने की पहल करें।
सिंदूर सुहाग सज गया, सीता की मांग भर गई ओ सिंदूर देने वाले सिंदूर की लाज रखना….. आने वाले समय में विवाह के समय विवाह मंडप पर सिंदूर दान के समय गाए जाने वाला यह पारंपरिक गीत यादों में रह जाए तो आश्चर्य नहीं होगा। भारतीय समाज में जिस तरीके से पति -पत्नी के बीच विवाद का मामला न्यायालय की चौखट पर जा रहा है वह चिंताजनक है। पति और पत्नी में पति और पत्नी में विवाह के बाद तकरार व नोंकझोंक सामान्य सी बात है। महिलाओं की काबिलियत पहले से बढ़ी है वे हर तरीक से सक्षम हो रही हैं इसमें दो राय नहीं है। लेकिन अहं की लड़ाई में विवाह को तोड़ने का निर्णय कतई सही नहीं है। राष्ट्र की सबसे छोटी इकाई परिवार है और व्यक्ति है। अगर परिवार टूटेगा तो समाज और राष्ट्र कमजोर होगा। एक परिवार को बनाने में काफी समय लगता है। ऐसे में सनातन संस्कृति में विवाह में सप्तपदी का काफी महत्व है। सप्तपदी मतलब सात वचन सात जन्म जन्मांतर का संबंध ।आज परिवारों के तकरार के मामले पर संबंध तोड़ने को दोनों पक्ष आतुर हैं यह चिंताजनक है। समाज और गणमान्य जनों को इस पर चिंतन करने की जरूरत है। संबंध तोड़ना आसान है लेकिन संबंध बनाने में जिंदगी गुजर जाती है। सबसे बुरा हाल उन बच्चों का होता है जिनके माता-पिता विवाह को ख्त्म करने की इच्छा रखते हैं। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले सालों में लोग शादी के नाम से दूर हो जाएंगे। पाश्चात्य संस्कृति का कॉनसेप्ट लिव इन रिलेशन जिसे लिव इन रिलेशनशिप कहा जाता है में शादी का संबंध बदल जाएगा। जिसे की भारतीय कानून से भी मान्यता मिली हुई है। वह आम हो जाएगा। ऐसे में संबंधों को बचाने और सिंदूर की लाज रखने के लिए तकरार को कम करने के लिए पहल की जरूरत है।