गलती जो अनजाने में करे उसे नादान कहते हैं, गलती जो अनजाने में करें उसे अनजान कहते हैं ,जो जानबूझकर करे गलती उसे शैतान कहते हैं
गलती जो स्वीकार करें उसे इंसान कहते हैं, पर जो गलती माफ करे उसे भगवान कहते हैं……….
अंतर्राष्ट्रीय विवाद हो या घर परिवार या समाज का झगड़ा सुलझाने के जो पुराने समय से चले आ रहे फार्मूले हैं वह आज भी हिट है तो क्यों न हम लड़ने की बजाय इसे सुलझाए
विवाद घर का हो या इंटरनेशनल लेवल का। सुलझाने का यही तरीका सबसे कारगर है।
समसामयिक – रूप कुमार लॉयर सह लीगल कंसलटेंट के साथ।
जिस तरह आज समाज में घरेलू विवाद एवं पारिवारिक कलह में लोग पिस रहे हैं, झगड़े हो रहे हैं उसी तरह राष्ट्रों के बीच में मतभेद एवं विवाद उत्पन्न होते रहते हैं। प्राचीन समय में इन झगड़ों का निपटारा प्राय: युद्ध के द्वारा हुआ करता था। और युद्ध में सिर्फ विनाश ही विनाश है। HONORABLE बापू की जयंती व सादगी के साधक HONORABLE पूर्व पीएम एलबी शास्त्री की जयंती पर आइए हम समाज में विवाद व कलह को कम करने के प्रयास का संकल्प लें। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
आधुनिक एवं वैज्ञानिक युग में वैज्ञानिक आविष्कारों ने युद्ध को विनाशकारी बना दिया है। इसी तरह घरेलू झगड़ों ने भी समाज को आज तोड़ कर रख दिया है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 33 में अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। अंतरराष्ट्रीय विवादों को निपटाने के सुझाए गए शांतिपूर्ण तरीके आज समाज में भी घरेलू एवं पारिवारिक झगड़ों को निपटाने का सबसे कारगर तरीका है।
इन तरीकों में –
पहला वार्ता या बातचीत या न्यूगोसियेसन NEGOTIATION – राष्ट्रों के बीच में झगड़े हो या परिवार के बीच झगड़े समाप्त करने का यह बहुत ही सरल लेकिन महत्वपूर्ण तरीका है बातचीत या वार्ता के द्वारा संदेह एवं भ्रांतियों को दूर कर नीतियों को स्पष्ट किया जा सकता है। जिससे मतभेद दूर किया जा सके। इस प्रकार की वार्ता राज्यों के अध्यक्ष के बीच तथा उनके प्रतिनिधियों के बीच या फिर उनके राजदूतों के बीच होती है। इस तरह घर या परिवार में घर के मुखिया या घर के वरिष्ठ तथा परिवार के अन्य लोगों के बीच बातचीत हो सकती है।
सुलह या कॉन्सिलिएशन CONCILIATION – सुलह का तात्पर्य पक्षकारों के बीच समझौता करना होता है। इसके अंतर्गत निष्पक्ष राज्य या निष्पक्ष व्यक्तियों के आयोग को मामला सौंप दिया जाता है। राज्य या आयोग अपनी रिपोर्ट में समस्या के निवारण के लिए सुलह के लिए प्रस्ताव देते हैं। यह प्रस्ताव पक्षकारों के लिए बाध्यकारी नहीं होते हैं, फिर भी विवादों को निपटाने का यह भी एक सरल व कारगर तरीका है। इंटरनेशनल विवाद की तरह ही घरेलू या पारिवारिक विवाद में भी इसका उपयोग किया जा सकता है। ये हो भी रहा है। जो कारगर है।
पंच निर्णय या आर्बिट्रेशन ARBITRATION – पंचों द्वारा झगड़े को समाप्त करने का तरीका प्राचीन समय से ही चला रहा है। इसके अंतर्गत पक्षकार अपनी इच्छा अनुसार विवाद के निपटारे के लिए पंचों को चुनते हैं। पंच निर्णय के लिए यह आवश्यक है कि निर्णय से ऐसे सिद्धांतों पर आधारित हो जो पहले से प्रचलित और उसने मान्यता का रूप ले लिया है। पंच का निर्णय अगर किसी पूर्व सिद्धांत पर आधारित न होकर अपनी इच्छा के अनुसार देते हैं तो निर्णय एकपक्षीय या एक्सपार्टी होगा और उसे मान्यता नहीं दी जा सकती है। इसलिए कहा गया है पंच परमेश्वर।
सेवाएं या गुड ऑफिसेज GOOD OFFICES- जब दो राष्ट्र अपने झगड़े का निपटारा आपस में नहीं कर पाते हैं तो तीसरा मित्र राष्ट्र उनके झगड़े को निपटाने में सहायता कर सकता है। इसमें तीसरा राष्ट्र विवाद को निपटाने में अपनी सेवाएं अर्पित करता है परंतु वह स्वयं इसमें भाग नहीं लेता है। यही समाज में होता है जब दो परिवार या दो व्यक्ति आपस में लड़ते हैं तीसरा व्यक्ति भले उसमें शामिल हों लेकिन वह अपनी सेवाएं झगड़े को सुलझाने में देकर तटस्थ रहकर विवाद का हल ढूंढ सकता है।
मध्यस्थता या मेडिएशन MEDIATION- मध्यस्थता के द्वारा भी तीसरा राष्ट्र अपने प्रयासों के द्वारा झगड़े को निपटाने का प्रयास कर सकता है। इस प्रयास में मध्यस्थता करने वाला राष्ट्र अपनी सेवाएं अर्पित नहीं करता बल्कि वार्ता में भी सम्मिलित रहता है। घरेलू झगड़ों एवं पारिवारिक विवाद को इसके जरिए भी दूर कर अदालतों में मुकदमों का बोझ कम किया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग OR इंटरनेशनल कमिशन ऑफ इंक्वायरी INTERNATIONAL COMMISSION OF ENQUIRY-
अंतरराष्ट्रीय आयोग विवादों की जांच के लिए गठित किया जाता है। यह आयोग विवादों के आधार का अध्ययन करता है। तथा विवादों के समाधान के लिए सुझाव प्रस्तुत करता है। इन सुझावों द्वारा ही जांच आयोग शांतिपूर्ण ढंग से अंतरराष्ट्रीय विवादों को निपटाने के लिए मार्ग निश्चित करता है।
जांच या इंक्वायरी INQUIRY – विवादों के निपटाने का यह एक महत्वपूर्ण तरीका है। इसके अंतर्गत तथ्यों की खोज की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य झगड़े से संबंधित तथ्यों की जांच करके उन्हें स्थापित करना है जिससे झगड़े का निपटारा हो सके। इस प्रकार उपरोक्त वर्णित शांतिपूर्ण तरीके से अंतर्राष्ट्रीय विवाद को सुलझाने के दो तरीके हैं। एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल सेटलमेंट EXTRA JUDICIAL SETTLEMENT – एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल सेटलमेंट के अंतर्गत विवादित राज्य अपने विवादों को करार के माध्यम से समझाते हैं। इसे राजनयिक प्रक्रिया भी कहा जाता है। वार्ता, सुलह, सेवाएं,मध्यस्थता के द्वारा किया गया निपटारा इसके अंतर्गत आते हैं।
ज्यूडिशियल सेटलमेंट JUDICIAL SETTLEMENT – ज्यूडिशियल सेटलमेंट विवादों को सुलझाने की एक विधिक प्रक्रिया है। दो राज्यों के बीच विवादों को सुलझाने में तीसरा राज्य मध्यस्थता करता है। तीसरा राज्य विधि एवं तथ्यों के आधार पर विवादों का निपटारा करता है। पंच निर्णय, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय, अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग के द्वारा किया गया निपटारा इसी प्रक्रिया के अंतर्गत आते हैं।
